बुधवार, 17 मार्च 2021

What is ROM? Example In Hindi, ROM क्या है? , How does ROM work

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What is ROM? Example In Hindi, ROM क्या है? , How does ROM work


What is ROM?


जैसे भगवान ने हमारे ब्रेन बनाया है, जिससे हम चीज लम्हे याद और बातों को अपने दिमाग में स्टोर कर सकते हैं, जरूरत पड़ने पर हम सब याद रख सकते हैं।


ठीक उसी तरह कंप्यूटर के साइंटिस्ट ने कंप्यूटर तो बनाया है, साथ ही उसमें डाटा स्टोर करने के लिए एक चिप भी बनाई जिसे मेमोरी कहा जाता है।


कंप्यूटर में प्रोग्राम डाटा और इंफॉर्मेशन को स्टोर करने के लिए मेमोरी की जरूरत होती है, ताकि हम कंप्यूटर से एक ही डाटा की मांग हर बार करें तो वह अपनी मेमोरी में वह स्टोर डाटा को निकाल कर हमें दिखा सके।


वैसे तो कंप्यूटर में मेमोरी बहुत सी प्रकार की होती हैं, लेकिन आज हम आपको ROM की जानकारी देने वाले हैं, कि आखिर यह ROM होता क्या है? इसका काम क्या है? और यह कितने प्रकार के होते हैं?


Toh Ayiye Sabse Phele Jante Hai Ki Rom kya Hai?


Rom को रीइड ओनली मेमोरी (Read Only Memory) कहां जाता है, जो सिर्फफ डाटा को रीड करने के लिए होती है।


यह एक चीफ के रूप में कंप्यूटर के मदरबोर्ड में लगाया जाता है, जो डाटा को परमानेंटली स्टोर कर लेता है।


यह एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है, मतलब जैसे कोई कंप्यूटर सिस्टम की पावर सप्लाई बंद हो जाती है, तो ROM अपने चीफ में सेव हुए डाटा को खोने नहीं देता।


ROM वो मेमोरी है, जिसमें कंप्यूटर के निर्माण के समय कंप्यूटर को स्टार्ट करने वाले प्रोग्राम और सेटिंग होते हैं, जो कंप्यूटर को बूट करने में मदद करते हैं, बूटिंग कंप्यूटर को स्टार्ट करने की प्रक्रिया को कहा जाता है।


इस मेमोरी में स्टोर किए गए प्रोग्राम को डिलीट नहीं किया जा सकता है, उन्हें सिर्फ रीड किया जा सकता है, इसलिए इसे रीड ओनली मेमोरी कहा जाता है।


Rom में स्टोर प्रोग्राम को BIOS जैसे बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम कहां जाता है।


Rom का यूज़ कंप्यूटर में Firmware सॉफ्टवेयर को स्टार्ट करने के लिए भी किया जाता है।


Firmware सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर में उस समय  इंस्टॉल किया जाता है, जिस समय हार्डवेयर पार्ट्स फैक्ट्री में बनाए जाते हैं। इसलिए इस सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर चलाने वाला सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है।


रोम का यूज कंप्यूटर के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में भी होता है, Rom और Ram कंप्यूटर की मैन मेमोरी होती है।


How does ROM work?


Rom एक चिप आकार की होती है, जो कि मदरबोर्ड और सीपीयू से जुड़ी होती है, Rom का यूज स्टोर के रूप में किया जाता है, जिसके अंदर हम कुछ भी डाटा सेट कर सकते हैं, जैसे कि सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन, डॉक्यूमेंट, ऑडियो, वीडियो-फाइल।


यह एक परमानेंट स्टोरेज डिवाइस है, इसमें से हम कभी भी डाटा को एक्सेस कर सकते हैं, Rom हमारे कंप्यूटर या मोबाइल के बूटिंग प्रोसेस और सिस्टम को स्टार्ट करने में हेल्प करता है


यह हमारे कंप्यूटर और मोबाइल का एक इंपोर्टेंट हिस्सा है, इसके बिना हम डाटा स्टोर करके नहीं रख सकते, जब हम कंप्यूटर या मोबाइल स्टार्ट करते हैं, तब किसी सॉफ्टवेयर ya एप्लीकेशन को चलाने के लिए rom से एप्लीकेशन का डाटा एक्सेस कर के Ram से वह एप्लीकेशन काम करता है।


फिर जब हम एप्लीकेशन बंद करते हैं, तब उसका डाटा फिर से Rom में सेव हो जाता है, और रैम से डाटा खाली हो जाता है, हम जितने वीडियोस फोटो या एप्लीकेशन डाउनलोड या इंस्टॉल करते हैं, वह सभी Rom में सेव होकर रहते हैं।


Ayiye jante hai ROM kitne prakar ki hoti hai.


Rom को उसके स्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरर और डाटा मिटाने के अनुसार तीन हिस्सों में बट जाता है।


  1. PROM
  2. EPROM
  3. EEPROM

1. Sabse phele hai PROM 


  •  इस का फुल फॉर्म है (Programmable Read only Memory)  यह एक मेमोरी चिप होती है, जिसे ओटीपी चीफ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें डाटा केवल एक बार ही प्रोग्राम किया जाता है, उसके बाद डाटा को इरॉस नहीं कर सकते।

  •  यूज़र मार्केट से ब्लैंक Rom खरीदते हैं, और उसमें जो इंट्रोडक्शन डालना चाहते हैं, वह डाल सकते हैं इस मेमोरी में छोटे-छोटे फ्यूज होते हैं, जिनके अंदर प्रोग्रामिंग के जरिए इंटरेक्शन डाला जाता है, जिससे दोबारा अपडेट नहीं किया जा सकता है।

  • PROM मैं परमानेंटली डाटा को स्टोर करने के लिए प्रोग्रामिंग को burning कहा जाता है, इसके लिए एक विशेष मशीन की जरूरत होती है, जिसे prom burner कहा जाता है।
  • PROM का यूज़ डिजिटल डिवाइस में डाटा को हमेशा सेव करने के लिए किया जाता है।

2. Second hai EPROM


  • Ise Erasable Programmable Read Only Memory kaha jata hai.
  •  इस चिप में स्टोर किए हुए इंफॉर्मेशन को UV rays द्वारा 40 मिनट तक पास किया जाता है, तब जाकर इस मेमोरी को Erase किया जा सकता है।
  •  इस Rom की खास बात यह है, कि इसे हम आसानी से ERase कर सकते हैं, और री प्रोग्राम भी कर सकते हैं।
  •  यह रोम सस्ती और भरोसेमंद होती है।
  • EPROM के कुछ ड्रॉपबॉक्स भी है, जैसे कि इसमें डाटा को erase करने के लिए बिजली की खपत बहुत होती है, इसमें डाटा को मिटाने या प्रोग्राम फिर से शुरू करने के लिए इसे कंप्यूटर से निकालना पड़ता है, जब हम UV Rays की मदद से डाटा को डिलीट करते हैं, तब इसमें चिप का पूरा डाटा डिलीट हो जाता है।

3. Third hai EEPROM 


  • इसका पूरा नेम (Electrically Erasable Programmable Read Only Memory) है।
  • इसे फ्लैश मेमोरी भी कहा जाता है।
  •  यह एक अन चेंज मेमोरी है क्योंकि इसमें भी डाटा को परमानेंटली स्टोर किया जाता है।
  •  फ्लैश मेमोरी में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की मदद से इसका डाटा डिलीट किया जाता है।
  • इस प्रकार की मेमोरी का यूज डिजिटल कैमरा या MP3 में होता है।
  • इससे हाइब्रिड मेमोरी भी कहा जाता है, क्योंकि ये Ram का सामान डाटा को रीड और राइट करता है, लेकिन rom के सामान डाटा को जोड़ करके रखता है, यह Ram और Rom दोनों का एक मिश्रण है।
  • EPROM की तरह इसका डाटा मिटाने के लिए चिप से बाहर निकालना पड़ता है, और साथ ही हम चुने हुए डाटा को भी डिलीट कर सकते हैं, जो कि हम EPROM में नहीं कर सकते हैं, जो क्योंकि वहां पर पूरा चिपका डाटा डिलीट हो जाता है।
  • EEPROM  मैं डाटा स्टोर करना आसान है और अनगिनत बार रिप्रोग्रामिंग भी किया जा सकता है।


Advantages of ROM?

  1. हम firmsoftware को स्टोर कर सकते हैं.
  2. Rom Ram से बहुत सस्ता होता है, और साइज में भी काफी ज्यादा छोटा होता है.
  3. Rom का डाटा अपने आप नहीं बदलता इसमें डाटा को सिर्फ रीड किया जा सकता है, अगर हम चाहे तो इसमें कोई नया डाटा जोड नहीं सकते क्योंकि इसमें डेवलपर के द्वारा एक ही बार डाटा को स्टोर किया जाता है।
  4. Rom Non-Volatile है जो प्रोग्राम को परमानेंट बनाए रखता है, जिससे कंप्यूटर के बंद होने से भी हमारा डाटा डिलीट नहीं होता।
  5. Rom कंप्यूटर के दूसरे मेमोरी Ram से ज्यादा सेफ है।
  6. Rom मैं बहुत ही सोच समझकर प्रोग्रामिंग या इंटरेक्शन डाला जाता है क्योंकि इससे हम बार-बार नहीं बदल सकते।
आशा करते हैं, आपको हमारा ब्लॉक पसंद आया होगा अगर आपका कोई सवाल या कोई शिकायत है, तो हमें कमेंट बॉक्स में करके पूछ सकते हैं।

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