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शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

Godzilla vs Kong Movie Review in Hindi

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Godzilla vs Kong Movie Review in Hindi


 गॉडजिला वर्सेस कोंग मूवी रिव्यू

फिल्म अंसस्टर लीबराय पे बेस्ड है। मतलब पूर्वजों के टाइम से गॉडजिला और कोंग के फैमिली वाले खुदको बेहतर साबित करने की जंग लड रहे है। 

नंबर 1 कोन है इसका फैसला इस बार होके रहेगा। लड़ाई एकदम टक्कर की है दोनों के जितने के चांसेज 50-50 है।  

एक तरफ खुदको पूरी दुनिया का किंग बोलने वाला किंग कोग है। जिनके दिमाग में गुस्से वाला स्विच लगा हुआ है। 

ऑफ़ होता है तो भाई साहब इंसानों के दोस्त बन जाते है। लेकिन जैसे ही स्विच ओंन होता है तो बीस्ट मूड एक्टिवेट हो जाता है। 

लेकिन सामने वाला दुश्मन भी कोई गली का गुंडा मावली नहीं है गोद है । वो क्रिएचर को पूरी दुनिया को एक चुटकी मे प्रेजेंट टेंस से पास्ट टेंस मे कन्वर्ट कर सकता है। 

अब ये दोनों आमने सामने आयेंगे कैसे और इस लड़ाई के एंडिंग में चैंपियन कोन बनेगा उसके बारे जादा कुछ नही बता सकती।

Godzilla vs Kong Movie

लेकिन फिल्म का कॉन्सेप्ट वहीं पुराना है जिसको देखकर सुनकर हम बचपन से जवानी तक पोच गए है। 

टेक्नोलॉजी वर्सेस नेचर। इंसानों की एविल डार्क साइड जिसने पूरे प्लैनेट का बैलंस बिगड़ के रख दिया और धीरे धीरे रिमोट कंट्रोल वापस नेचर के हाथ में आगया।

सुनामी वागेरे सब भूल जाओ इस्बार दुनिया पे गोडजिल्ला के गुस्से का तूफान टूटने वाला है। जिसके अपोजिट मे अपने कोंग भैया खड़े होगे लास्ट रे ऑफ़ होप बनके।

अब डायरेक्ट इस प्वाइंट पे आते है कि फिल्म देखनी चाहिए कि नहीं तो जवाब लाउड एंड क्लियर है 1000 % अभी देख कर आओ।

एक्शन मूवी के फैन हो तो ये मूवी आपके लिए आने ऑफ़ द बेस्ट मूवी है। क्लाइमैक्स मे जो फाइनल बटल हुई है उससे आपको गुसबम आ जाएगे। एक्सपेक्टेशन थी कि फिल्म में मार धार जबरदस्त देखने को मिलेगी लेकिन जो उसके अराउंड स्टोरी लाइन तयार की गई है वो असली एक्स फैक्टर साबित होती है। 

क्या हुआ क्यू हुआ कैसे हुआ ये सब अक्सर एक्शन मूवी मे कहीं पीछे छूट जाता है लेकिन इस मूवी में चोटी से चोटी डिटेल पर भी ध्यान दिया है।

मेकर्स के लिए सबसे बदा चैलेंज था कओंग और गॉडजिला दोनों को दिमाग से यूज करना। एक को वीक दिखा के दूसरे को सुप्रीम नहीं दिखा सकते हो।

इसको कैसे अचीव किया जाए मुझे तो एक दम इंपॉसिबल लगरा था। लेकिन तारीफ करनी होगी डायरेक्टर एंड कंपनी की जिन्होंने फिल्म को इतने क्रिएटिव तरीके से प्रेजेंट किया है।

कि ऑडियंस को कंपरीजन का जवाब भी मिल गया और दोनों मॉनस्टर की इज्जत भी बच गई। एक फ्रिक्शनाल मूवी मे इमोशनल क्रिएट करना ये तोह कमाल है यार इस मूवी वो भी देखने को मिलेगा। 

इनशोर्ट ये मूवी एकदम परफेक्ट फिर चाहे बात एक्शन की हो इमोशन की। अगर आप का कोई सवाल है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

बुधवार, 31 मार्च 2021

Saina Movie Review In Hindi

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Saina Movie Review In Hindi


साइना मूवी रिव्यू

साइना नेहवाल द देसी बैडमिंटन चैंपियन इनकी जिंदगी पे फिल्म बनके रिलीज होगी है। 

पहेली बात कर लेते है साइना की ये लड़की एकदम बवाल है। पूरी दुनिया की सबसे बेहतरीन बेटमिंटन खिलाड़ी है। 2015 मे वर्ल्ड चैंपियन बन चुकी है। 

अब बात करते है, फिल्म की तोह इसमें साइना का रोले प्ले कर रही है, परिणीति चोपड़ा। पहले दुनिया को अपने टैलेंट की पहेचान करना बादमें सामने खड़े होने वाले धुस्मन को चित्त करना फिर प्यार कि कुर्बानी देना और लास्ट में फाइनली अपने नाम के आगे चैंपियन लगाना बस इसमें पूरी फिल्म ख़तम।

Saina Movie

अब बात करते है फिल्म देखनी चाहिए कि नहीं। तोह इसका जवाब हा भी ह और ना भी ।


पहेली हा की बात कर लेते है। अगर मोटीवेशन वाले वीडियो देखते हो तोह ये फिल्म आपके लिए परफेक्ट है, दो घंटे सिर्फ अच्छी बाते सीखने को मिलेगी। जैसे कि जिंदगी की लड़ाई कैसे लदनी है। गिरकर कैसे उठना है।

अब ना की बात कर लेते है, सबसे बड़ी प्रॉब्लम है, कास्टिंग परिणीति अच्छी एक्टर तोह है, लेकिन वो साइना के रोल में फिट नहीं होरी है।

इनके चलने का स्टाइल, बोलने का स्टाइल, बैडमिंटन से प्यार सब अलग है। पूरी फिल्म साइना का केरेक्टर कहीं दिख ही नहीं रहा है। सिर्फ परिणीति का चेहरा ही दिमाग में घूमता है। 

जैसे एम एस धोनी में सुशांत ने धोनी का केरेक्टर पकड़ा था। लॉग गए तो धोनी को देखने थे पर शुशंट के फैन बन गए थे। 

फिल्म में कहीं भी शुशांत को हीरो बनाने की कोशिश नहीं की थी। सिर्फ धोनी बनाने की कोशिश की थी।

ऐसा कुछ भी इस फिल्म में नहीं दिखा। ना कोई स्ट्रगल ना कोई नीचे से ऊपर जाने का सफर। हर 5 मिनट में एक मैच दिखाते है, जो साइना जीत जाती है।

फिल्म के डायरेक्टर ने सिर्फ साइना के मॉल पे ध्यान दिया है, हर फ्रेम मे मॉल का साइज बदल रहा है। 

लेकिन सपोर्टिंग कास्ट ने दिल जीत लिया है, स्पेशली साइना की मा ने और मानव कोल थे कोच सर।

इंशोरट साइना एक टाइमपास मूवी है, लाइफ मे मोटीवेशन की कमी है, जोश चाइए या फिर सिर्फ खुशियां ढूंढ रहे हो तो अभी जाके फिल्म देखलो।

मेरी तरफ से फिल्म को सिर्फ 2 स्टार। एक स्टार मेघना और मानव के जोड़ी के लिए। और एक स्टार साइना के रियल लाइफ स्टोरी को रील कि थ्रू इंस्पिरेशन के जैसे शोकेस करने के लिए।

रविवार, 28 मार्च 2021

Thalaivi Movie Trailer Review In Hindi

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Thalaivi Movie Trailer Review In Hindi


थलायिवी ट्रेलर रिव्यु 

फिल्म है जयललिता के बारे में वो नाम जिसने पूरे इंडिया को हिलाकर रख दिया था। पहले फिल्म इंडस्ट्री फिर पॉलिटिक्स मैडम के नाम का शोर कुछ ऐसा था जिससे बड़े से बड़े सुपरस्टार से लेके बड़े नेताओं तक सबको दिन मे तरे दिखा दिए। 

Thalaivi trailer review

शुरुवात तो मामूली से नाम जया से हुई थी, लेकिन फिर बादमें हजारों लाखों लोगों का दिल जीत कर ये अम्मा के नाम से मशहूर होगी।


जयललिता एक हीरो थी जिन्होंने पॉलिटिक्स की दुनिया में औरतों को असली रिस्पेक्ट दिलाया था।


बात करते है ट्रेलर केसा है तो पॉवरफुल मजेदार जबरदस्त सब कुछ क्युकी ट्रेलर सब चीज की जलक दिखी है, रोमांस है इमोशन है मोटीवेशन है गुस्सा है पंगा है रिवेंज है।


ट्रेलर से जया मैडम के पॉलिटिकल सीन्स गायब कर दिए है। अम्मा का सबसे फेमस गेटअप जिसके लिए लोग इंतेज़ार करे थे वो ट्रेलर मे ह ही नहीं।


और ये फिल्म मल्टीपल लैंग्वेज में रिलीज होरी है। हिंदी, तमिल, और तेलगु।


हिंदी ट्रेलर मे कंगना को फोकस में रखा है वहीं तमिल ट्रेलर में एम जी आर के चारैक्टर को सेंटर में रखा गया है।


फिल्म की रिलीज डेट 23 अप्रैल है जब यह फिल्म रिलीज होगी फिल्म का रिव्यू पढ़ने जरूर आएगा।

शनिवार, 20 मार्च 2021

How Many Words We Should Use for Blogging? In Hindi

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How Many Words We Should Use for Blogging? In Hindi



हाउ मेनी वर्ड्स वी शुल्ड यूज फोर ब्लॉगिंग

ये एक ऐसा सवाल है जिसका कोई एक्यूरेट जवाब नहीं है। फिर भी ये बोल सकते है, कि मिनिमम 300 वर्ड्स और मैक्सिमम 2500 वर्ड्स तक ब्लॉग लिख सकते है। 

इस सवाल को जितना डेप्थ मे समजना भोत जरूरी हे, ताकी इस वर्ड्स की कहानी को आसानी से समझा जा सके।


SEO के लिए ब्लॉग पोस्ट कितने शब्द होनी चाहिए?


ब्लॉग का मेन पर्पज अपनी रेलावंट ऑडियंस से कनेक्ट करना होता है। और अपनी साइट पे ट्रैफिक बूस्ट करना और क्वालिटी लीड्स लाना भी होता है।


ऐसे में कॉन्टेंट जितना तेजी से आपके ऑडियंस तक पोचेगा उतना आपकी वेबसाइट से विजिट बढ़ने के चांसेज बढ़ेगे और यही तोह आप चाहते है।


ये तोह सभी चाहते है, कि उनके ब्लॉग पे जादा रीडर्स जादा कॉमेंट्स ज्यादा लिंक्स और जादा ट्रैफिक आए। 


लेकिन इस के लिए एक ब्लॉगर की दौर पे कुछ बातें जानने की जरूरत होगी। क्युकी आपकी ब्लॉग की लेंथ कितनी होनी चाहिए? यानी कितने वर्ड्स का ब्लॉग होना चाइए? जिससे आपका ब्लॉग हाई रैंकिंग में आ सकता है।


ब्लॉग कितने शब्दों का होना चाहि? 300 शब्द ब्लॉग पोस्ट उदाहरण।


इसके साथ भोत से फैक्टर जुड़े होते है, जैसे कि अगर आप जादा शेयर और कमेंट चाहते है, तो आप स्टैंडर्ड ब्लॉगिंग लेंथ 300 से 600 वर्ड्स का ब्लॉग लिख सकते है, जिससे आपको एवरेज शेयर और कमेंट मिल जायेगे।


लेकिन सर्च इंजन के लिए ये आइडियल लेंथ नहीं है। अगर आप न्यूज के लिए ब्लॉग लिखते है,  तोह 750 वर्ड्स मे आपको दूसरे ब्लॉगर्स से लिंक्स और सोशियल मीडिया पर अच्छी खासी शारिंग और कमेंट आपके ब्लॉग पर आएंगे।


अगर आप ज्यादा शेयर चाहते है, तो 1000 से 1500 वर्ड्स अपने ब्लॉग में लिखे। लेकिन इस लेंथी ब्लॉग मे आप रीडर्स के कोई ऐसी प्रबलम का सॉल्यूशन दे जिसकी उनको जरूरत हो।


और उन्हें इसे अपने दोस्तो के साथ शेयर करना जरूरी लगे। ब्लॉग के लैंथी होते जाने के साथ उससे मिलने वाले ट्रैफिक का रिलेशन भोत हद तक आपके कॉन्टेंट से होगा।


Ideal blog post length 2021.


इसीलिए भेतर कॉन्टेंट के लिए आपको क्या करना चाइए इस बारे में भी जनेगे। पहेली ये जानते है कि ब्लॉग अगर 1500 वर्ड्स से बडा होगा तो क्या कोई उसे पड़ेगा।


1600 वर्ड्स यानी 7 मिनट रीडिंग टाइम आइडियल माना जाता है। और 2500 वर्ड्स के ब्लॉग को हाई रैंकिंग मिलती है। 


अगर आप सर्च इंजन पे अच्छी रैंकिंग चते है, और हर महीने हजारों नए रीडर्स चते है, तो आपको इस लेंथ के ब्लॉग लिखने चाइए। लेकिन इसके लिए आपका कंटेंट  बढ़िया होना चाहिए और आपके रीडर्स के सर्च को सेटिस्फाई करने वाला भी


इसका मतलब ये हुआ कि आपको 1000 से 2500 वर्ड्स का ब्लॉग लिखना पड़ेग।


लेकिन प्रबोबलम तब अति ह जब ब्लॉगर सिर्फ रैंकिंग पे ही ध्यान देते और कॉन्टेंट पे नहीं। ऐसे में उनकी कॉन्टेंट की क्वालिटी कम हो जाती है।


और रीडर्स के सतिस्फैक्शन नहीं होते है। और उनका ब्लॉग रिक्वायर्ड लेंथ होने के बाद भी अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाता।


इसलिए सिर्फ ब्लॉग की लेंथ को ध्यान में रखकर लिखने ना बल्कि उस टॉपिक की दीप और इंपोर्टेंट इंफॉर्मेशन शेयर करने के लिए ब्लॉग लिखे।


फिर चाहे वो 1500 वर्ड्स मे आ जाए या 2500 वर्ड्स मे हो सकता है 3000 वर्ड्स भी लग जाए। लेकिन आपका ब्लॉग कंटेंट इंपोर्टेंट, एक्साइटिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग, और जिसपे एक्शन लिया जा सके ऐसा होना चईय। ना की बे वजह लिखा वाला एक बोरिंग टॉपिक । 

इसलिए आपको लेंथ के लिए तो लिखना ह लेकिन साथ में रीडर का ध्यान रखते हुए उनके प्रॉब्लम के सॉल्यूशन के लिए भी लिखना है।


Ideal article length


वैसे ये वर्ड लेंथ हर इंडस्ट्री पर बेस्ड ब्लॉग के अकॉर्डिंग अलग अलग भी होते है।


  • फाइनेंस ब्लॉग - 2100 से 2500 वर्ड्स.
  • हैल्थ केयर - 2000 से 2150 वर्ड्स.
  • मैन्युफै्चरिंग इंडस्ट्री - 1700 से 1900 वर्ड्स.
  • होम एंड गार्डन - 1100 से 1200 वर्ड्स.
  • टेक्नोलॉजी - 800 से 1000 वर्ड्स.
  • फैशन - 800 से 950 वर्ड्स.
  • फूड - 1400 से 1900 वर्ड्स.
  • ट्रैवल के लिए 1500 से 1850 वर्ड्स.


यानी आप जिस इंडस्ट्री पे बेस्ड ब्लॉगिंग करते है, उसके अकॉर्डिंग वर्ड लेंथ का आइडिया लेके ब्लॉगिंग सुरु कर सकते है।


 ब्लॉग पर कितनी पोस्ट करें? 


अच्छी रैंकिंग के लिए हफ्ते में 2 या 4 पोस्ट जरूर करें। जितना जलदी जलदी ब्लॉग पोस्ट करेगे उतना ही आपके ब्रांड आपके प्रोडक्ट मे ट्रस्ट डेवलप होगा। 


जिससे आपके ब्लॉग को विजिट और कन्वर्शन दोनों मे ही बेस्ट रिजल्ट मिल सकेगे। अपने ब्लॉग की लैंग्वेज आसान रखिए ताकि उसे आसानी से पढ़ा जा सके और पढ़ने का मन भी करे।


अपनी इंफॉर्मेशन छोटे छोटे पैराग्राफ मे लिखे। और ब्लॉग मे टाइटल सबटाइटल और हाइलाइट्स का यूज करे ताकि रीडर्स का इंटरेस्ट बना रहे।


टारगेट लेंथ पूरा करने के लिए बेवजह के वर्ड्स अपने ब्लॉग मे यूज ना करे। ऐसा करने से आपके कॉन्टेंट की वैल्यू गिरेगी।


अपने कंटेंट मे एक्टिव वॉयस बर्ब का यूज करे। यानी आप अपने रीडर से डायरेक्ट बात करे। और उन्हें एक्शन लेने के लिए एनकरेज करे।


लैंग्वेज ऐसी ही रखे जैसे आप अपने दोस्तो से ही बात करते हो। 


अगर आप चाहते है कि आपके ब्लॉग पे जादा से जादा रीडर्स आए तो अपने ब्लॉग मे कॉन्टेंट के साथ साथ फोटोज और विडियोज की भी एड करे। जो रीडर्स को बोर होने से बचाएं।


इतनी सारी बातो के बाद भी ये नहीं पता चला कि आपको एक्जेक्ट कितने वर्ड्स का ब्लॉग लिखना है। आपको सिर्फ अपने कंटेंट की क्वालिटी पे ध्यान देना है, और ये भी ध्यान रखना है, की आपके रीडर्स बोर ना हो और उनका इंटरेस्ट बना रहे।


आपके निस के अकॉर्डिंग आपके ब्लॉग की लेंथ डिसाइड करे। आशा करता हूं, आज का ब्लॉग अच्छा लगा होगा आपका कोई सवाल है, तो हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं।

शुक्रवार, 19 मार्च 2021

How To Become Computer Expert? In Hindi, कंप्यूटर एक्सपर्ट कैसे बनें?

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कंप्यूटर एक्सपर्ट बन्ना कोई एक दिन का काम नहीं है जिसमें कई महीने से कई साल लग सकता है।


और यह सब डिपेंड करता है, कि आपको कंप्यूटर के फील्ड में कितना इंटरेस्ट और रोज आप कंप्यूटर सीखने में कितना टाइम देते हैं।

How To Become Computer Expert? In Hindi, कंप्यूटर एक्सपर्ट कैसे बनें?


और ऐसे में कई सारे लोग तो बिना कंप्यूटर में डिग्री पूरी करे बिना कंप्यूटर में जीनियस बन जाते हैं।


Toh ap bhi sochte hoge ki kese computer expert bana jaye?


इसके लिए किस तरह की पढ़ाई हमें करनी चाहिए?10th के बाद की 12th के बाद तो आइए जान लेते हैं। कुछ टिप्स जिसे फॉलो करके आप कंप्यूटर एक्सपर्ट बन सकते हैं।


Toh 1st hai computer ki basic jankari le


अगर आप भी स्कूल के स्टूडेंट हैं, और आप घर जाकर कंप्यूटर एक्सपोर्ट बनना चाहते हैं, लेकिन फिलहाल आपको कंप्यूटर की कुछ खास जानकारी नहीं है, तो सबसे पहले आपको कंप्यूटर के बेसिक के बारे में जानना बहुत जरूरी है।


जैसे कि कंप्यूटर क्या है? कैसे चालू होता है? इसमें रैम क्या होता है? हार्ड डिक्स क्या होती है? किस तरह कंप्यूटर में पासवर्ड लगाया जाता है? इत्यादि।


Toh start me computer ya laptop system chalana sikhe 


तो इसके लिए आप चाहे तो किसी कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में सीख सकते हैं, या फिर कंप्यूटर लेकर आप इंटरनेट से भी सीख सकते हैं।


कंप्यूटर चलाना सीखे पावर पॉइंट, एक्सेल वर्डपॉइंट, याह सब सीखे और कंप्यूटर के हार्डवेयर पार्ट्स की जानकारी ले।


Second hai sabhi tarah ke operating system ko chalana sikhye


एक कंप्यूटर ऑपरेटर को सिर्फ एक ही ऑपरेटिंग सिस्टम चलाना नहीं आता, बल्कि उससे कई तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम की नॉलेज होती है। जैसे की विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम मैक ओ एस इत्यादि।


तो इन सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में आपको पता होना चाहिए यानी चलाना आना चाहिए, तो इन ऑपरेटिंग सिस्टम को अपने कंप्यूटर में इंस्टॉल करके ओ एस की जानकारी ले सकते हैं।


ताकि आप से कोई किसी भी कंप्यूटर में प्रॉब्लम हो तो आप उसे ठीक कर सकते हैं।


Third hai compy ki problem ko thik karne ki koshish kare


  • एक कंप्यूटर एक्सपोर्ट या मास्टर का काम यही होता है कि, उसके कंप्यूटर के बारे में सारी जानकारी हो और कंप्यूटर में किसी भी तरह की प्रॉब्लम को आसानी से ठीक कर सके।
  • तो ऐसे में आपके सामने जो भी कंप्यूटर से रिलेटेड प्रॉब्लम आती हैं, उन्हें आप ठीककरने की कोशिश करें अगर आप से ठीक नहीं हो रही है, तो आप कोशिश करें कि इंटरनेट कि मदद ले।
  • इंटरनेट में आपको सारे हल मिल जाएंगे जैसे कि तरीके से प्रॉब्लम को सॉल्व करने की कोशिश करें।
  • इसके अलावा आपके किसी दोस्त या परिवार में से किसी के कंप्यूटर में कोई प्रॉब्लम आती है, तो उसे भी ठीक करने की कोशिश करें और उन्हें उस प्रॉब्लम का सलूशन बताएं।
  • तो इससे आपके कंप्यूटर में जो भी एक्सपीरियंस है, वह तो बढ़ेगा ही और बाद में कभी फिर से वह प्रॉब्लम आपके सामने आएगी तो आप आसानी से उस प्रॉब्लम को ठीक कर सकते हैं, वह भी बिना किसी की मदद लिए।

Fourth hai online blog aur video dekhe


  • एक कंप्यूटर जीनियस या फिर कहें कि एक कंप्यूटर एक्सपोर्ट रोजाना नई नई चीजों के बारे में नॉलेज लेते हैं।
  • ऑनलाइन ब्लॉक आर्टिकल पढ़ें और इंटरनेट पर वीडियो देखें कि कंप्यूटर और इंटरनेट के बारे में जहां से उन्हें कई चीजों के बारे में पता चलता है, जो कि आपको पता नहीं होता।
  •  अगर आपको भी बनना है, एक कंप्यूटर एक्सपोर्ट तो आपको भी डेली कंप्यूटर और इंटरनेट से जुड़े ब्लॉग को पढ़ना चाहिए और वीडियो भी देखने चाहिए ताकि आपके नॉलेज रोजाना बढ़ता जाए और आने वाले समय में आप को कंप्यूटर के बारे में काफी अच्छी नॉलेज भी हो जाए।

Fifth hai computer ki advance skills ki jankari le 


  • जैसे ही आपको लगता है, कि कंप्यूटर के बेसिक के बारे में काफी कुछ समझ गए हैं, और आपको कंप्यूटर एक खिलौने की तरह लगने लगेगा।
  • तो इसके बाद आप कंप्यूटर में एडवांस स्किल की जानकारी भी ले सकते हैं।
  • जैसे कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, लैंग्वेज, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, कैसे बनाते हैं नेटवर्किंग, इत्यादि के बारे में जानकारी ले सकते हैं।


अगर आप अभी स्कूल में पढ़ते हैं, तो मेरी एडवाइजर यही होगी आपके लिए कि आप 10th पास करने के बाद 11th में कंप्यूटर साइंस सब्जेक्ट ले और इसके बाद जैसे ही 12th पास कर लेते हैं, तो इसके बाद आपको कॉलेज में।


कंप्यूटर साइंस इंजीनियर के सब्जेक्ट को चुनना होगा ताकि आप इन्हीं सब चीजों के बारे में पढ़ सकें, तो इस डिग्री में आपको इन्हीं सब चीजों के बारे में पढ़ाया जाता है।


तो अगर आपको कंप्यूटर एक्सपर्ट बनना है, तो यह डिग्री आपके लिए बहुत ही बेनिफिशियल होगी, और सीखना कभी बंद ना करें शायद आप नहीं जानते होंगे कि कंप्यूटर एक्सपोर्ट कभी भी सीखना बंद नहीं करते हैं।


तो अगर आप ऐसा सोचते हैं, कि कॉलेज में डिग्री या मास्टर कर लेने के बाद आप एक कंप्यूटर एक्सपर्ट बन गए हैं, तो ऐसा कभी मत सोचिए गा।


हमेशा कंप्यूटर के बारे में जो कुछ भी छोटा-मोटा ज्ञान मिले छोटी से छोटी इंफॉर्मेशन मिले आप उसे सीखते रहिए क्योंकि कौन सी चीज कब काम आए कुछ कहा नहीं जा सकता है।


तो इन सभी टॉपिक को फॉलो करके आप कंप्यूटर एक्सपर्ट बन सकते हैं, और इस फील्ड में अपना करियर बना सकते हैं, आशा करते हैं, आपको हमारा ब्लॉक पसंद आया होगा, अगर आपका कोई सवाल या कुछ शिकायत है तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

बुधवार, 17 मार्च 2021

What is ROM? Example In Hindi, ROM क्या है? , How does ROM work

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What is ROM? Example In Hindi, ROM क्या है? , How does ROM work


What is ROM?


जैसे भगवान ने हमारे ब्रेन बनाया है, जिससे हम चीज लम्हे याद और बातों को अपने दिमाग में स्टोर कर सकते हैं, जरूरत पड़ने पर हम सब याद रख सकते हैं।


ठीक उसी तरह कंप्यूटर के साइंटिस्ट ने कंप्यूटर तो बनाया है, साथ ही उसमें डाटा स्टोर करने के लिए एक चिप भी बनाई जिसे मेमोरी कहा जाता है।


कंप्यूटर में प्रोग्राम डाटा और इंफॉर्मेशन को स्टोर करने के लिए मेमोरी की जरूरत होती है, ताकि हम कंप्यूटर से एक ही डाटा की मांग हर बार करें तो वह अपनी मेमोरी में वह स्टोर डाटा को निकाल कर हमें दिखा सके।


वैसे तो कंप्यूटर में मेमोरी बहुत सी प्रकार की होती हैं, लेकिन आज हम आपको ROM की जानकारी देने वाले हैं, कि आखिर यह ROM होता क्या है? इसका काम क्या है? और यह कितने प्रकार के होते हैं?


Toh Ayiye Sabse Phele Jante Hai Ki Rom kya Hai?


Rom को रीइड ओनली मेमोरी (Read Only Memory) कहां जाता है, जो सिर्फफ डाटा को रीड करने के लिए होती है।


यह एक चीफ के रूप में कंप्यूटर के मदरबोर्ड में लगाया जाता है, जो डाटा को परमानेंटली स्टोर कर लेता है।


यह एक नॉन वोलेटाइल मेमोरी होती है, मतलब जैसे कोई कंप्यूटर सिस्टम की पावर सप्लाई बंद हो जाती है, तो ROM अपने चीफ में सेव हुए डाटा को खोने नहीं देता।


ROM वो मेमोरी है, जिसमें कंप्यूटर के निर्माण के समय कंप्यूटर को स्टार्ट करने वाले प्रोग्राम और सेटिंग होते हैं, जो कंप्यूटर को बूट करने में मदद करते हैं, बूटिंग कंप्यूटर को स्टार्ट करने की प्रक्रिया को कहा जाता है।


इस मेमोरी में स्टोर किए गए प्रोग्राम को डिलीट नहीं किया जा सकता है, उन्हें सिर्फ रीड किया जा सकता है, इसलिए इसे रीड ओनली मेमोरी कहा जाता है।


Rom में स्टोर प्रोग्राम को BIOS जैसे बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम कहां जाता है।


Rom का यूज़ कंप्यूटर में Firmware सॉफ्टवेयर को स्टार्ट करने के लिए भी किया जाता है।


Firmware सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर में उस समय  इंस्टॉल किया जाता है, जिस समय हार्डवेयर पार्ट्स फैक्ट्री में बनाए जाते हैं। इसलिए इस सॉफ्टवेयर को हार्डवेयर चलाने वाला सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है।


रोम का यूज कंप्यूटर के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में भी होता है, Rom और Ram कंप्यूटर की मैन मेमोरी होती है।


How does ROM work?


Rom एक चिप आकार की होती है, जो कि मदरबोर्ड और सीपीयू से जुड़ी होती है, Rom का यूज स्टोर के रूप में किया जाता है, जिसके अंदर हम कुछ भी डाटा सेट कर सकते हैं, जैसे कि सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन, डॉक्यूमेंट, ऑडियो, वीडियो-फाइल।


यह एक परमानेंट स्टोरेज डिवाइस है, इसमें से हम कभी भी डाटा को एक्सेस कर सकते हैं, Rom हमारे कंप्यूटर या मोबाइल के बूटिंग प्रोसेस और सिस्टम को स्टार्ट करने में हेल्प करता है


यह हमारे कंप्यूटर और मोबाइल का एक इंपोर्टेंट हिस्सा है, इसके बिना हम डाटा स्टोर करके नहीं रख सकते, जब हम कंप्यूटर या मोबाइल स्टार्ट करते हैं, तब किसी सॉफ्टवेयर ya एप्लीकेशन को चलाने के लिए rom से एप्लीकेशन का डाटा एक्सेस कर के Ram से वह एप्लीकेशन काम करता है।


फिर जब हम एप्लीकेशन बंद करते हैं, तब उसका डाटा फिर से Rom में सेव हो जाता है, और रैम से डाटा खाली हो जाता है, हम जितने वीडियोस फोटो या एप्लीकेशन डाउनलोड या इंस्टॉल करते हैं, वह सभी Rom में सेव होकर रहते हैं।


Ayiye jante hai ROM kitne prakar ki hoti hai.


Rom को उसके स्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरर और डाटा मिटाने के अनुसार तीन हिस्सों में बट जाता है।


  1. PROM
  2. EPROM
  3. EEPROM

1. Sabse phele hai PROM 


  •  इस का फुल फॉर्म है (Programmable Read only Memory)  यह एक मेमोरी चिप होती है, जिसे ओटीपी चीफ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें डाटा केवल एक बार ही प्रोग्राम किया जाता है, उसके बाद डाटा को इरॉस नहीं कर सकते।

  •  यूज़र मार्केट से ब्लैंक Rom खरीदते हैं, और उसमें जो इंट्रोडक्शन डालना चाहते हैं, वह डाल सकते हैं इस मेमोरी में छोटे-छोटे फ्यूज होते हैं, जिनके अंदर प्रोग्रामिंग के जरिए इंटरेक्शन डाला जाता है, जिससे दोबारा अपडेट नहीं किया जा सकता है।

  • PROM मैं परमानेंटली डाटा को स्टोर करने के लिए प्रोग्रामिंग को burning कहा जाता है, इसके लिए एक विशेष मशीन की जरूरत होती है, जिसे prom burner कहा जाता है।
  • PROM का यूज़ डिजिटल डिवाइस में डाटा को हमेशा सेव करने के लिए किया जाता है।

2. Second hai EPROM


  • Ise Erasable Programmable Read Only Memory kaha jata hai.
  •  इस चिप में स्टोर किए हुए इंफॉर्मेशन को UV rays द्वारा 40 मिनट तक पास किया जाता है, तब जाकर इस मेमोरी को Erase किया जा सकता है।
  •  इस Rom की खास बात यह है, कि इसे हम आसानी से ERase कर सकते हैं, और री प्रोग्राम भी कर सकते हैं।
  •  यह रोम सस्ती और भरोसेमंद होती है।
  • EPROM के कुछ ड्रॉपबॉक्स भी है, जैसे कि इसमें डाटा को erase करने के लिए बिजली की खपत बहुत होती है, इसमें डाटा को मिटाने या प्रोग्राम फिर से शुरू करने के लिए इसे कंप्यूटर से निकालना पड़ता है, जब हम UV Rays की मदद से डाटा को डिलीट करते हैं, तब इसमें चिप का पूरा डाटा डिलीट हो जाता है।

3. Third hai EEPROM 


  • इसका पूरा नेम (Electrically Erasable Programmable Read Only Memory) है।
  • इसे फ्लैश मेमोरी भी कहा जाता है।
  •  यह एक अन चेंज मेमोरी है क्योंकि इसमें भी डाटा को परमानेंटली स्टोर किया जाता है।
  •  फ्लैश मेमोरी में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की मदद से इसका डाटा डिलीट किया जाता है।
  • इस प्रकार की मेमोरी का यूज डिजिटल कैमरा या MP3 में होता है।
  • इससे हाइब्रिड मेमोरी भी कहा जाता है, क्योंकि ये Ram का सामान डाटा को रीड और राइट करता है, लेकिन rom के सामान डाटा को जोड़ करके रखता है, यह Ram और Rom दोनों का एक मिश्रण है।
  • EPROM की तरह इसका डाटा मिटाने के लिए चिप से बाहर निकालना पड़ता है, और साथ ही हम चुने हुए डाटा को भी डिलीट कर सकते हैं, जो कि हम EPROM में नहीं कर सकते हैं, जो क्योंकि वहां पर पूरा चिपका डाटा डिलीट हो जाता है।
  • EEPROM  मैं डाटा स्टोर करना आसान है और अनगिनत बार रिप्रोग्रामिंग भी किया जा सकता है।


Advantages of ROM?

  1. हम firmsoftware को स्टोर कर सकते हैं.
  2. Rom Ram से बहुत सस्ता होता है, और साइज में भी काफी ज्यादा छोटा होता है.
  3. Rom का डाटा अपने आप नहीं बदलता इसमें डाटा को सिर्फ रीड किया जा सकता है, अगर हम चाहे तो इसमें कोई नया डाटा जोड नहीं सकते क्योंकि इसमें डेवलपर के द्वारा एक ही बार डाटा को स्टोर किया जाता है।
  4. Rom Non-Volatile है जो प्रोग्राम को परमानेंट बनाए रखता है, जिससे कंप्यूटर के बंद होने से भी हमारा डाटा डिलीट नहीं होता।
  5. Rom कंप्यूटर के दूसरे मेमोरी Ram से ज्यादा सेफ है।
  6. Rom मैं बहुत ही सोच समझकर प्रोग्रामिंग या इंटरेक्शन डाला जाता है क्योंकि इससे हम बार-बार नहीं बदल सकते।
आशा करते हैं, आपको हमारा ब्लॉक पसंद आया होगा अगर आपका कोई सवाल या कोई शिकायत है, तो हमें कमेंट बॉक्स में करके पूछ सकते हैं।

मंगलवार, 16 मार्च 2021

Blogging Tips for Begginers (2021) In Hindi

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Blogging Tips for Begginers (2021) In Hindi


अगर आप ब्लॉगिंग शुरू करने का सोच रहे हो, तो इन दो बातो का खास ख्याल रखे, इन दो चीजों के बिना आप कभी भी ब्लॉगिंग मे सफल नहीं हो पाएंगे।

सबसे बड़ी और इंपोर्टेंट चीज ह कॉन्टेंट राइटिंग


बहुत से लोग जो ब्लॉगिंग तो स्टार्ट कर देते है, पर उन्हें कॉन्टेंट राइटिंग नहीं आती है।


अब आपके मन में सवाल होगा कि कंटेंट राइटिंग कहां से सीखे?


कंटेंट राइटिंग सीखने के लिए आपको पढ़ना पड़ेगा, आप बुक से पढ़ सकते है, ब्लॉग पढ़ सकते है, कविता पढ़ सकते है, दूसरी साइट से आर्टिकल भी पढ़ सकते है।


और अपनी कॉन्टेंट राइटिंग के स्किल्स को बेहतर कर सकते हैं। कोई भी ब्लॉगिंग का बेस होता है, कॉन्टेंट राइटिंग यही एक चीज है, जो आपको ब्लॉगिंग मे ज़ीरो से हीरो के तरफ ले जाएगा।


टेक्निकल नॉलेज


और दूसरी चीज ब्लॉगिंग का मंडेटरी भी साबित हो सकता है, जिसमे 4-5 चीजें अति है, जैसे कि डोमेन, कस्टमाइज़, थीम, एसिओ, इंशोट आपको सारे टेक्निकल चीजें भी स्मजनी होगी सीखनी होगी।


आप अपनी साइट खुदसे सेटअप करे या किसी और से कराए, आगे चलकर आपको ये सब चीजें सीखनी ही पड़ेगी।


जैसे कि गूगल की ऐडसेंस लगाना, हाइपरलिंक लगाना, इमेज लगाना। इन सबके लिए आपको बसिक प्रोग्रामिंग स्किल्स आना जरूरी है।


तो ब्लॉगिंग के लिए दो इंपोर्टेंट स्किल्स है कॉन्टेंट राइटिंग और प्रोग्रामिंग की बेसिक स्किल्स।


आशा करता हूं, आपको हमारा ब्लॉग पसंद आया होगा, अगर आपके मन में कोई सवाल, या कुछ सुझाव है, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।